गुर्दे की पथरी (Kidney Stone): कारण, लक्षण, इलाज और बचाव
गुर्दे की पथरी एक आम लेकिन बहुत तकलीफ़देह समस्या है। सही जानकारी और समय पर इलाज से इसे नियंत्रित किया जा सकता है और भविष्य में दोबारा बनने का जोखिम भी कम किया जा सकता है। इस लेख में हम सरल भाषा में गुर्दे की पथरी के कारण, लक्षण, जांच, इलाज और बचाव के तरीके समझेंगे।
1. गुर्दे की पथरी क्या होती है?
गुर्दे की पथरी (Kidney Stone) दरअसल खनिज और नमक (जैसे कैल्शियम, ऑक्ज़ेलेट, यूरिक एसिड आदि) के छोटे–छोटे ठोस जमा होते हैं, जो गुर्दों के अंदर या मूत्र मार्ग (Urinary Tract) में बनते हैं। शुरुआत में ये बहुत छोटे कणों की तरह होते हैं, लेकिन समय पर इलाज न होने पर ये आकार में बड़े होकर पथरी का रूप ले लेते हैं।
जब यह पथरी गुर्दे से मूत्रनली (Ureter) में चलती है, तो तेज़ दर्द, खून आना और पेशाब में तकलीफ़ जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। हर पथरी को ऑपरेशन की ज़रूरत नहीं होती, लेकिन कुछ मामलों में तुरंत इलाज ज़रूरी होता है।
2. गुर्दे की पथरी के प्रकार
सभी पथरियाँ एक जैसी नहीं होतीं। उनकी बनावट और कारण थोड़े अलग हो सकते हैं:
- कैल्शियम ऑक्ज़ेलेट पथरी: सबसे आम प्रकार। शरीर में कैल्शियम और ऑक्ज़ेलेट की मात्रा ज़्यादा होने पर यह बनती है। कम पानी पीना, नमक ज़्यादा लेना, कुछ खास खाद्य पदार्थ (जैसे पालक, चुकंदर, मेथी आदि) और कुछ दवाएँ इसका जोखिम बढ़ा सकती हैं।
- यूरिक एसिड पथरी: यह उन लोगों में अधिक पाई जाती है जो ज़्यादा नॉन-वेज (रेड मीट, अंग मांस), मछली, या हाई प्रोटीन डाइट लेते हैं, या जिनको गाउट (Gout) की बीमारी होती है।
- स्ट्रूवाइट पथरी: यह आमतौर पर बार-बार होने वाले यूरिन इंफेक्शन (UTI) के बाद बनती है। यह तेज़ी से बड़ी हो सकती है और कई बार पूरी किडनी को भर देती है।
- सिस्टीन पथरी: यह कम पाई जाती है और अक्सर जेनेटिक (वंशानुगत) समस्या के कारण बनती है, जिसमें सिस्टीन नामक अमीनो एसिड मूत्र में ज़्यादा मात्रा में निकलता है।
3. गुर्दे की पथरी के कारण
अक्सर गुर्दे की पथरी के पीछे कई कारण एक साथ काम करते हैं। मुख्य कारण इस प्रकार हैं:
- कम पानी पीना (डिहाइड्रेशन): जब हम दिन भर में पर्याप्त पानी नहीं पीते, तो मूत्र गाढ़ा हो जाता है और उसमें मौजूद खनिज एक-दूसरे से चिपक कर पथरी बनाने लगते हैं। गर्म इलाक़ों या धूप में काम करने वालों में यह जोखिम ज़्यादा होता है।
- गलत खानपान: नमक ज़्यादा, तली-भुनी चीज़ें, बहुत ज़्यादा चीनी, सोडा वाले पेय, रेड मीट, अधिक प्रोटीन और हाई ऑक्ज़ेलेट फूड (पालक, चाय, चॉकलेट, नट्स, काली मिर्च आदि) का ज़्यादा सेवन पथरी की संभावना बढ़ा सकता है।
- परिवार में इतिहास (जेनेटिक कारण): यदि आपके परिवार में किसी को बार-बार पथरी होती रही है, तो आपके अंदर भी पथरी बनने का जोखिम बढ़ जाता है।
- कुछ बीमारियाँ: मोटापा, गाउट, हाइपरपैराथायरॉइडिज़्म, बार-बार यूरिन इंफेक्शन, कुछ आंतों की बीमारियाँ (जैसे इन्फ्लैमेटरी बाउल डिजीज), या बाइपास सर्जरी आदि भी पथरी का कारण बन सकते हैं।
- कुछ दवाएँ और सप्लीमेंट: कुछ दवाएँ (जैसे कुछ एंटीबायोटिक, कैल्शियम या विटामिन डी के अत्यधिक सप्लीमेंट) भी पथरी बनने का जोखिम बढ़ा सकती हैं, खासकर यदि बिना डॉक्टर की सलाह लंबे समय तक ली जाएं।
4. गुर्दे की पथरी के लक्षण
छोटी पथरी कई बार बिना किसी लक्षण के भी मूत्र के साथ निकल सकती है। लेकिन जब पथरी बड़ी हो या मूत्रनली में फंस जाए, तो निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
- तेज़, चुभने वाला दर्द: कमर के एक तरफ या पीठ के निचले हिस्से में अचानक तेज़ दर्द, जो पेट, नाभि, जांघ या जननांगों (groin) की तरफ फैल सकता है। यह दर्द लहर की तरह आता-जाता है।
- पेशाब में जलन या दर्द: पेशाब करते समय जलन होना या दर्द महसूस होना।
- पेशाब में खून: मूत्र का रंग गुलाबी, लाल या भूरा दिखना, जो खून की मिलावट के कारण हो सकता है।
- बार-बार या तुरंत पेशाब की इच्छा: थोड़ी-थोड़ी देर में बार-बार पेशाब लगना, लेकिन मात्रा कम आना।
- मतली और उल्टी: दर्द की वजह से मिचली या उल्टी होना।
- बुखार और ठंड लगना: यदि पथरी के साथ इंफेक्शन भी हो जाए, तो तेज़ बुखार, ठंड लगना, कंपकंपी आदि लक्षण हो सकते हैं। यह स्थिति इमरजेंसी होती है।
ध्यान रखें, दर्द की तीव्रता हमेशा पथरी के आकार पर निर्भर नहीं करती। छोटी पथरी भी यदि संकरी जगह पर फंस जाए तो बहुत ज़्यादा दर्द दे सकती है।
5. गुर्दे की पथरी का निदान (Diagnosis)
डॉक्टर आपके लक्षण सुनकर और शारीरिक जांच करके सबसे पहले शक करते हैं कि आपको पथरी हो सकती है। सही पुष्टि करने के लिए कुछ टेस्ट किए जाते हैं:
- अल्ट्रासाउंड (Ultrasound): यह एक आसान, बिना दर्द वाला और सुरक्षित टेस्ट है। इससे किडनी और मूत्रनली में पथरी की उपस्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
- सीटी स्कैन (CT Scan): कई बार अल्ट्रासाउंड से स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती या पथरी बहुत छोटी होती है। ऐसे में CT KUB (Kidney, Ureter, Bladder) स्कैन कराया जाता है, जो पथरी के सही आकार, जगह और संख्या की विस्तृत जानकारी देता है।
- एक्स-रे (KUB X-ray): कुछ प्रकार की पथरी एक्स-रे में दिखाई देती है। डॉक्टर इलाज की योजना बनाने या फॉलो-अप के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं।
- मूत्र जांच (Urine Test): इसमें खून, पस, क्रिस्टल, इंफेक्शन के संकेत आदि देखे जाते हैं। इससे यह पता चलता है कि पथरी के साथ कोई इंफेक्शन तो नहीं है।
- खून की जांच (Blood Test): किडनी फंक्शन, यूरिक एसिड, कैल्शियम और अन्य खनिजों के स्तर की जांच से पथरी के कारण और किडनी की सेहत के बारे में जानकारी मिलती है।
6. गुर्दे की पथरी का इलाज (Treatment)
पथरी का इलाज उसके आकार, जगह, संख्या, प्रकार, आपके लक्षण और किडनी की कार्यक्षमता पर निर्भर करता है। मुख्य विकल्प नीचे दिए गए हैं:
6.1 दवाइयों से इलाज
- दर्द निवारक दवाएँ: तेज़ दर्द को कम करने के लिए पेनकिलर दी जाती हैं, जो डॉक्टर की सलाह से ही लेनी चाहिए।
- पथरी निकालने में मदद करने वाली दवाएँ: छोटी पथरी (आमतौर पर 5–6 मिमी से कम) के लिए कुछ दवाएँ दी जाती हैं जो मूत्रनली को थोड़ा ढीला करके पथरी को बाहर निकलने में मदद करती हैं (जैसे अल्फा-ब्लॉकर)।
- इंफेक्शन होने पर एंटीबायोटिक: यदि मूत्र जांच में इंफेक्शन मिले तो एंटीबायोटिक दी जाती हैं।
6.2 लिथोट्रिप्सी (Extracorporeal Shock Wave Lithotripsy – ESWL)
इस प्रक्रिया में शरीर के बाहर से विशेष मशीन की मदद से पथरी पर शॉक वेव (झटके वाली तरंगें) डाली जाती हैं। इससे पथरी छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाती है, जो बाद में पेशाब के साथ बाहर निकल जाते हैं। यह तरीका आमतौर पर मध्यम आकार की कुछ खास जगहों पर स्थित पथरियों के लिए उपयोग किया जाता है।
6.3 एंडोस्कोपिक सर्जरी (मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया)
- यूरेटेरोस्कोपी (URS): मुंह या मूत्रमार्ग से एक पतली ट्यूब (एंडोस्कोप) को अंदर ले जाया जाता है, जिसके ज़रिए पथरी को देखा जाता है और लेज़र या अन्य उपकरणों से तोड़कर निकाला जाता है।
- पीसीएनएल (PCNL – Percutaneous Nephrolithotomy): बड़ी या जटिल पथरी के लिए पीठ पर एक छोटा छेद करके सीधे किडनी में पहुंचा जाता है और पथरी को तोड़कर निकाला जाता है। यह सामान्य एनेस्थीसिया के तहत होता है।
6.4 अन्य सर्जिकल विकल्प
आज के समय में खुली सर्जरी (Open Surgery) बहुत कम मामलों में ही ज़रूरी पड़ती है, जैसे बहुत बड़ी या अजीब तरह से फंसी हुई पथरी, या जब अन्य तरीकों से फायदा न हो।
6.5 घरेलू उपाय: क्या ध्यान रखें?
बहुत से लोग घरेलू नुस्खों के सहारे पथरी ठीक करने की कोशिश करते हैं, जैसे काढ़े, जड़ी-बूटियाँ, या इंटरनेट पर बताई गई चीज़ें। कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है:
- पर्याप्त मात्रा में साफ पानी पीना लाभदायक है, लेकिन यदि पहले से किडनी की बीमारी या दिल की बीमारी है, तो पानी की मात्रा डॉक्टर से पूछकर ही बढ़ाएँ।
- नींबू पानी (बिना ज़्यादा चीनी के) में मौजूद साइट्रेट कुछ मामलों में पथरी बनने से बचाव में मदद कर सकता है, लेकिन यह इलाज का विकल्प नहीं है।
- कोई भी जड़ी-बूटी, काढ़ा या सप्लीमेंट अपने आप न लें। कई बार ये किडनी पर बुरा असर डाल सकते हैं या आपकी दवाओं के साथ रिएक्शन कर सकते हैं।
याद रखें, यदि पथरी बड़ी हो, दर्द ज़्यादा हो, या इंफेक्शन के लक्षण हों, तो घरेलू उपायों में समय गंवाना खतरनाक हो सकता है।
7. परहेज़ और बचाव (Prevention)
एक बार पथरी हो जाने के बाद दोबारा बनने का जोखिम काफी बढ़ जाता है। इसलिए इलाज के साथ-साथ बचाव पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी है:
- पर्याप्त पानी पिएँ: आमतौर पर दिन भर में इतना पानी पिएँ कि आपका मूत्र हल्का पीला या लगभग पारदर्शी रहे। अधिकतर स्वस्थ वयस्कों के लिए यह लगभग 2–3 लीटर प्रतिदिन हो सकता है, लेकिन यह मात्रा आपकी उम्र, मौसम, काम और अन्य बीमारियों के अनुसार बदल सकती है।
- नमक कम लें: ज़्यादा नमक से मूत्र में कैल्शियम की मात्रा बढ़ जाती है, जो पथरी का जोखिम बढ़ाती है। पैकेट वाले खाने, नमकीन, पापड़, अचार, प्रोसेस्ड फूड आदि कम लें।
- संतुलित प्रोटीन: बहुत अधिक नॉन-वेज, खासकर रेड मीट और अंग मांस, यूरिक एसिड पथरी का जोखिम बढ़ा सकता है। प्रोटीन की मात्रा संतुलित रखें और अधिकतर प्रोटीन दाल, फलियाँ, पनीर, दही जैसे स्रोतों से लें (यदि डॉक्टर ने मना न किया हो)।
- ऑक्ज़ेलेट से भरपूर चीज़ें सीमित करें: यदि आपकी पथरी कैल्शियम ऑक्ज़ेलेट की है, तो पालक, चुकंदर, चॉकलेट, नट्स, काली चाय, चाय पत्ती, मेथी आदि का सेवन सीमित करना फायदेमंद हो सकता है।
- शक्कर और सॉफ्ट ड्रिंक कम करें: बहुत ज़्यादा चीनी, खासकर फ्रुक्टोज़ और कोल्ड ड्रिंक्स, पथरी का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
- नींबू, संतरा जैसे खट्टे फल: इनमें मौजूद साइट्रेट कई बार पथरी बनने से बचाव में मदद करता है। लेकिन यदि आपको एसिडिटी या अन्य समस्या हो तो डॉक्टर से पूछकर ही ज़्यादा लें।
- नियमित व्यायाम: हल्की–फुल्की शारीरिक गतिविधि, वजन नियंत्रण और स्वस्थ जीवनशैली भी पथरी से बचाव में सहायक होती है।
यदि आपको पहले से पथरी रही है, तो डॉक्टर कई बार पथरी का विश्लेषण (Stone Analysis) करवा कर आपकी डाइट के लिए विशेष सुझाव देते हैं। उन सलाहों का पालन करना बहुत ज़रूरी है।
8. कब डॉक्टर के पास जाएँ?
निम्न स्थितियों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:
- अचानक शुरू हुआ तेज़, असहनीय कमर या पेट का दर्द
- पेशाब में खून दिखना
- पेशाब बिल्कुल न आना या बहुत कम आना
- दर्द के साथ बुखार, ठंड लगना या कंपकंपी होना
- बार-बार उल्टी होना, पानी भी न रुकना
- आपको पहले से किडनी की बीमारी, डायबिटीज, दिल की बीमारी हो और साथ में ये लक्षण दिखाई दें
- गर्भावस्था (प्रेगनेंसी) के दौरान किसी भी तरह का तेज़ कमर या पेट दर्द
ऐसी स्थितियों में देरी करना किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है या जान के लिए खतरा भी बन सकता है।
9. आयुर्वेदिक उपचार (Ayurvedic Treatment)
कई लोग गुर्दे की पथरी के लिए आयुर्वेदिक दवाओं और जड़ी-बूटियों के बारे में पूछते हैं। आयुर्वेद में कुछ ऐसी औषधियाँ बताई गई हैं जो मूत्र मार्ग को सपोर्ट करने, सूजन कम करने और पथरी बनने के जोखिम को घटाने में मदद कर सकती हैं। कुछ आमतौर पर बताई जाने वाली चीज़ें इस प्रकार हैं (सिर्फ जानकारी के उद्देश्य से):
- Punarnava (Boerhavia diffusa): हल्का diuretic माना जाता है, यानी शरीर से अतिरिक्त पानी और सूजन कम करने में मदद कर सकता है। फ्लूड बैलेंस (fluid balance) सपोर्ट करने के लिए कई आयुर्वेदिक कॉम्बिनेशन में इसका प्रयोग होता है।
- Gokhru / Gokshura (Tribulus terrestris): मूत्र मार्ग (urinary tract) को सपोर्ट करने के लिए पारंपरिक रूप से उपयोग की जाने वाली जड़ी-बूटी। कई लोग मानते हैं कि यह पेशाब का फ्लो बेहतर कर पथरी निकलने में अप्रत्यक्ष रूप से मदद करती है।
- Varuna (Crataeva nurvala): आयुर्वेदिक ग्रंथों में मूत्र संबंधी समस्याओं और पथरी के लिए वर्णित। माना जाता है कि यह पथरी को तोड़ने (breaking) और दोबारा बनने से रोकने में सपोर्टिव भूमिका निभा सकती है।
- Patharchatta / Paan-futti (Bryophyllum pinnatum): पारंपरिक घरेलू उपयोग में “पत्थरचट्टा” नाम से जाना जाता है। लोक चिकित्सा में इसे पथरी गलाने (dissolve करने) के लिए प्रयोग किया जाता रहा है, हालाँकि वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं।
- Chandraprabha Vati: एक क्लासिकल आयुर्वेदिक योग, जिसे मूत्र मार्ग, बार-बार पेशाब, हल्की सूजन और कुछ तरह की पथरी की स्थितियों में उपयोग किया जाता है। इसका सही उपयोग केवल आयुर्वेदिक वैद्य की सलाह से ही होना चाहिए।
- Gokshuradi Guggulu: किडनी और urinary tract के सपोर्ट के लिए उपयोग की जाने वाली प्रसिद्ध आयुर्वेदिक formulation। अक्सर इसे पथरी की प्रवृत्ति, हल्के दर्द और सूजन आदि में वैद्य की सलाह के अनुसार दिया जाता है।
- Diet Tips (आहार संबंधी सुझाव):
- खाने में कम नमक रखें, ज़्यादा नमक से मूत्र में कैल्शियम बढ़ सकता है और पथरी की संभावना बढ़ती है।
- दिन भर में डॉक्टर की सलाह के अनुसार ज़्यादा पानी पीने की आदत डालें, ताकि पेशाब साफ और हल्के रंग का रहे।
- कैल्शियम ऑक्ज़ेलेट पथरी की प्रवृत्ति होने पर ऑक्ज़ेलेट वाली चीज़ें (जैसे बहुत ज़्यादा पालक, चाय, चॉकलेट, नट्स आदि) सीमित मात्रा में लें, जैसा कि आपका डॉक्टर या डाइटीशियन बताए।
- महत्वपूर्ण Disclaimer: आयुर्वेदिक दवाएँ और जड़ी-बूटियाँ भी दवा ही हैं। इन्हें हमेशा किसी qualified Ayurvedic vaidya / BAMS doctor की सीधी निगरानी में ही लेना चाहिए। खुद से नुस्खे आज़माना, इंटरनेट या पड़ोसी की सलाह पर दवा शुरू करना किडनी पर उल्टा असर डाल सकता है या दूसरी चल रही एलोपैथिक दवाओं के साथ रिएक्शन दे सकता है।
ध्यान दें: ऊपर दी गई सारी जानकारी केवल शैक्षणिक है। किस व्यक्ति को कौन-सी आयुर्वेदिक दवा, कितनी मात्रा में और कितने समय तक देनी है, यह पूरा निर्णय सिर्फ अनुभवयुक्त आयुर्वेदिक चिकित्सक ही आपकी रिपोर्ट, उम्र, अन्य बीमारियों और चल रही दवाओं को देखकर कर सकते हैं।
10. होम्योपैथिक उपचार (Homeopathic Treatment)
होम्योपैथी में भी गुर्दे की पथरी और उससे होने वाले दर्द के लिए कई दवाओं का उल्लेख मिलता है। होम्योपैथिक उपचार का सबसे बड़ा सिद्धांत individualisation है यानी हर मरीज की पूरी प्रकृति, लक्षणों की बारीकियाँ और मानसिक–शारीरिक स्थिति देखकर दवा चुनी जाती है। कुछ commonly उपयोग की जाने वाली दवाओं की शैक्षणिक जानकारी नीचे दी जा रही है:
- Berberis Vulgaris: kidney stones के लिए सबसे commonly बताई जाने वाली होम्योपैथिक दवाओं में से एक। आमतौर पर तेज़, चुभने वाला या काटने जैसा दर्द जो कमर से जांघ या groin की तरफ फैलता हो, और burning urination के साथ हो, तब उपयोग की जाती है।
- Cantharis: जब पेशाब के दौरान या बाद में बहुत ज़्यादा जलन हो, हर समय पेशाब की तीव्र इच्छा बनी रहे लेकिन थोड़ी–थोड़ी मात्रा में ही आए, और हर बूंद के साथ दर्द हो – ऐसे लक्षणों में यह दवा चुनी जा सकती है।
- Sarsaparilla: उन मरीजों में सोची जाती है जिनको पेशाब के अंत में दर्द ज़्यादा होता है, कभी–कभी दाहिनी तरफ की पथरी और पतली या रुक–रुक कर आने वाली धार के साथ pain हो।
- Lycopodium: दाहिनी तरफ (right-sided) kidney या ureter की शिकायतें, पेशाब में लाल रेत जैसा तलछट (red sand), साथ में गैस, पेट फूलना, बदहज़मी या एसिडिटी जैसी digestive समस्याएँ – ऐसे केसों में उपयोग की जा सकती है।
- Calcarea Carbonica: जिन लोगों में बार–बार पथरी बनने की प्रवृत्ति हो, calcium metabolism से जुड़ी दिक्कतें हों, साथ में ठंड लगने, पसीना ज़्यादा आने (खासकर सिर या पैरों में), मोटापा या थकान जैसी constitutional खासियतें हों, उनमें यह दवा सोची जाती है।
- Ocimum Canum: तेज़ renal colic (किडनी की पथरी का दर्द) के साथ बेचैनी, चिल्लाहट, cramping type दर्द, और कई बार मितली–उल्टी के साथ stones निकलने के एपिसोड में बताई जाती है।
- Dosage Guidance (खुराक और potency): होम्योपैथिक दवाओं की potency (जैसे 30, 200, 1M आदि) और dose हमेशा किसी qualified homeopathic doctor (BHMS / MD) से ही तय करवानी चाहिए। खुद से high potency या बार–बार dose लेना, अलग–अलग दवाएँ mix करके लेना सही नहीं है।
- Important Note: यह जानकारी केवल educational purpose के लिए है। होम्योपैथी में हर मरीज का individual case taking करके दवा चुनी जाती है; इसलिए दो लोगों को एक जैसी पथरी होने पर भी दवा अलग हो सकती है।
अत्यंत महत्वपूर्ण: यदि आपको तेज़ दर्द, पेशाब में खून, बुखार या पेशाब रुकने जैसी Emergency स्थिति हो, तो सिर्फ होम्योपैथिक या किसी भी alternative इलाज पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में सबसे पहले नज़दीकी अस्पताल या यूरोलॉजिस्ट से तुरंत संपर्क करें; किसी भी पूरक (complementary) उपचार को मुख्य इलाज के साथ केवल डॉक्टर की जानकारी में ही जोड़ा जाना चाहिए।
सारांश
गुर्दे की पथरी आम है, लेकिन सही समय पर पहचान और इलाज से इससे होने वाली जटिलताओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। पर्याप्त पानी पीना, संतुलित और कम नमक वाला भोजन, अनावश्यक दवाओं से बचना और नियमित स्वास्थ्य जांच आपको स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है। यदि कभी भी तेज़ दर्द, पेशाब में खून या बुखार जैसे लक्षण दिखें, तो स्वयं इलाज करने की बजाय तुरंत किसी योग्य यूरोलॉजिस्ट या किडनी विशेषज्ञ से सलाह लें।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल शैक्षणिक और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। यह किसी भी प्रकार से डॉक्टर की सलाह या इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आपको अपने स्वास्थ्य, लक्षणों या दवाओं के बारे में कोई भी चिंता या सवाल हो, तो कृपया किसी योग्य पंजीकृत चिकित्सक (क्वालिफाइड डॉक्टर) से सीधे परामर्श लें।
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